इस विषय से मेल खाता अनुभव
सामाजिक विज्ञान के प्रोग्राम ऐसे छात्रों को महत्व देते हैं, जिन्होंने सिद्धांतों को असल जिंदगी में उतरते देखा है। ऐसी भूमिकाओं का अनुभव मूल्यांकनकर्ता को परखने के लिए भरपूर सामग्री देता है:
- सपोर्ट वर्कर, केस मैनेजर या की वर्कर
- यूथ वर्कर, कम्युनिटी डेवलपमेंट ऑफिसर या आउटरीच कोऑर्डिनेटर
- फैमिली सपोर्ट या ह्यूमन सर्विसेज प्रैक्टिशनर
- HR एडवाइजर, एम्प्लॉयी एक्सपीरियंस लीड या पीपल एनालिटिक्स स्पेशलिस्ट
- चैरिटी या गैर-लाभकारी संस्था (NGO) में प्रोग्राम मैनेजर
- हाउसिंग, वेलफेयर या प्रोबेशन ऑफिसर
- रिसर्च असिस्टेंट, सर्वे एनालिस्ट या इनसाइट मैनेजर
लोगों के साथ काम कैसे अकादमिक क्रेडिट बनता है
इनमें से ज्यादातर नौकरियों में आपको व्यवहार देखना, जानकारी जुटाना, उसे तौलना और अपना आकलन दर्ज करना होता है। ये सामाजिक विज्ञान के मूल कौशल हैं। आपके नीड्स असेसमेंट, सपोर्ट प्लान और प्रोजेक्ट इवैल्यूएशन मूल्यांकनकर्ता को दिखाते हैं कि आप लोगों और समाज से जुड़े विचारों को व्यवहार में लागू कर सकते हैं।
नीतियों की जानकारी भी गिनी जाती है। अगर आपने सेफगार्डिंग (कमजोर लोगों की सुरक्षा), समानता या डेटा प्रोटेक्शन से जुड़े ढांचों के भीतर काम किया है, तो आप पहले से समझते हैं कि सामाजिक व्यवस्थाएं रोजमर्रा में कैसे चलाई जाती हैं।
मॉड्यूल, जिन्हें आपका अनुभव कवर कर सकता है
ह्यूमन सर्विसेज, समाजशास्त्र और सामाजिक नीति
- सामाजिक नीति का परिचय
- समुदाय और सामाजिक बदलाव
- कमजोर वर्गों के साथ काम
- सामाजिक शोध के तरीके, अगर आपने सर्वे या इवैल्यूएशन किए हैं
मनोविज्ञान पर आधारित प्रोग्राम
- ऑर्गनाइजेशनल बिहेवियर और कार्यस्थल का मनोविज्ञान
- जीवनकाल विकास (लाइफस्पैन डेवलपमेंट)
- समूह की गतिशीलता और संवाद
- व्यावहारिक शोध और सांख्यिकी
प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन: आपका अगला कदम
इस विषय की डिग्री मदद करने वाले पेशों के लिए मजबूत नींव देती है। साइकोलॉजिस्ट, काउंसलर या सोशल वर्कर के रूप में प्रैक्टिस करना उससे आगे का कदम है, जिसमें अपनी अलग मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग, निगरानी में प्रैक्टिस और जहां आप काम करना चाहते हैं वहां की प्रोफेशनल संस्था या लाइसेंसिंग बोर्ड से रजिस्ट्रेशन शामिल होता है।
इस रास्ते के बारे में सोच रहे हैं? आपके सलाहकार ऐसे प्रोग्राम्स अलग से दिखा सकते हैं, जिन्हें संबंधित प्रोफेशनल संस्था मान्यता देती है, ताकि आज की डिग्री कल की योजनाओं में काम आए।
स्तर और देश के हिसाब से डिग्री के नाम
| स्तर | UK के नाम | अमेरिका के नाम | ऑस्ट्रेलिया के नाम |
|---|---|---|---|
| एसोसिएट | FdA हेल्थ एंड सोशल केयर; FdA यूथ एंड कम्युनिटी वर्क | साइकोलॉजी में AA; ह्यूमन सर्विसेज में AS | सोशल साइंस में डिप्लोमा या एसोसिएट डिग्री |
| बैचलर | BA (Hons) सोशल साइंसेज; BSc (Hons) साइकोलॉजी; BA (Hons) सोशियोलॉजी | ह्यूमन सर्विसेज में BS; साइकोलॉजी या सोशियोलॉजी में BA | बैचलर ऑफ सोशल साइंस; बैचलर ऑफ ह्यूमन सर्विसेज; बैचलर ऑफ साइकोलॉजिकल साइंस |
| मास्टर | MSc ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी; MA सोशल पॉलिसी | इंडस्ट्रियल-ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी में MS; ह्यूमन सर्विसेज में MS | मास्टर ऑफ सोशल साइंस; मास्टर ऑफ ह्यूमन सर्विसेज |
| डॉक्टरेट | PhD; डॉक्टर ऑफ सोशल साइंस (DSocSci) | ह्यूमन सर्विसेज या इंडस्ट्रियल-ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी में PhD | PhD; प्रोफेशनल डॉक्टरेट |
अनुभव से क्रेडिट की सबसे ज्यादा गुंजाइश आमतौर पर बैचलर प्रोग्राम्स में होती है। मास्टर स्तर पर भी मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड आपके आवेदन को बढ़त दे सकता है।
करियर, जिनमें यह डिग्री मदद करती है
ग्रेजुएट सर्विस मैनेजर, कम्युनिटी एंगेजमेंट लीड, पॉलिसी ऑफिसर, एम्प्लॉयी वेलबीइंग मैनेजर, रिसर्च ऑफिसर और पीपल एनालिटिक्स लीड जैसे पदों पर पहुंचते हैं। ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री टैलेंट असेसमेंट, कल्चर चेंज और ऑर्गनाइजेशनल डेवलपमेंट के लिए सही है, जबकि ह्यूमन सर्विसेज की डिग्री केयर, हाउसिंग और यूथ सर्विसेज में सीनियर पदों तक पहुंचने में मदद करती है।
अपने प्रमाण जुटाना
- किसी सुपरवाइजर से विस्तृत रेफरेंस मांगें। हमारा रेफरेंस लेटर जनरेटर उन्हें एक साफ ढांचा देता है।
- काम के कुछ नमूने जुटाएं, जैसे कोई असेसमेंट, सपोर्ट प्लान, प्रोजेक्ट रिपोर्ट या सर्वे का सारांश, हर नाम और पहचान बताने वाली हर जानकारी हटाकर।
- ट्रेनिंग रिकॉर्ड जोड़ें: सेफगार्डिंग, मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड, मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग या रिसर्च एथिक्स के कोर्स।
- छोटे-छोटे चिंतन नोट लिखें, जो हर उदाहरण को उससे मिली सीख से जोड़ें।
समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहां से करें? तैयारी जांच में कुछ ही मिनट लगते हैं, और आपको प्रमाणों की अपनी सूची मिल जाती है।